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| नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में साफ कहा कि उनकी उद्धव ठाकरे से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। |
'उद्धव ठाकरे से कोई नाराजगी नहीं'
नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में साफ कहा कि उनकी उद्धव ठाकरे से कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अपनी विचारधारा से समझौता नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ "एक शिवसेना से दूसरी शिवसेना" में गए हैं।
उन्होंने कहा, "मैं कहीं नहीं गया हूं। मैं सिर्फ शिवसेना से शिवसेना में आया हूं। मेरी विचारधारा वही है और मैं जनता के लिए पहले की तरह काम करता रहूंगा।"
संजय राउत की टिप्पणी बनी टर्निंग प्वाइंट
आष्टीकर ने बताया कि वह और कुछ अन्य सांसद 18 जून तक कोई फैसला नहीं लेना चाहते थे। लेकिन उस दिन उनके खिलाफ कुछ टिप्पणियां की गईं, जिसके बाद उन्हें लगा कि पार्टी में बने रहने का कोई मतलब नहीं है।
उनका इशारा शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस की ओर था, जिसमें उन्होंने बागी सांसदों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि नागेश पाटिल ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि उन बयानों ने उनके फैसले को प्रभावित किया।
फंड की कमी से परेशान थे सांसद
हिंगोली सांसद ने कहा कि जनता ने उन्हें बड़ी उम्मीदों के साथ चुना है और उनके क्षेत्र का विकास कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन विपक्षी दल में होने की वजह से उन्हें पर्याप्त विकास निधि नहीं मिल पा रही थी।
उन्होंने कहा, "5 करोड़ रुपये का MPLAD फंड बहुत सीमित है। पिछले दो वर्षों से लगातार प्रयासों के बावजूद मैं अपने क्षेत्र के लिए पर्याप्त विकास निधि नहीं ला सका। जनता के काम कराने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है और इसी वजह से मुझे यह फैसला लेना पड़ा।"
उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी गठबंधन के साथ जुड़कर अब वह अपने क्षेत्र के विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा सकेंगे।
'मेरे पास दूसरा विकल्प नहीं था'
नागेश पाटिल ने कहा कि पार्टी नेतृत्व के कुछ लोग उनके फैसले से नाराज हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ वे उनकी मजबूरी और परिस्थितियों को समझेंगे।
उन्होंने कहा, "मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। जनता ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे निभाना मेरी प्राथमिकता है।"
'ऑपरेशन तुड़वा' पर भी दिया जवाब
हाल ही में संजय राउत ने बागी सांसदों को चेतावनी देते हुए कहा था कि उन्हें शिवसैनिकों के "ऑपरेशन तुड़वा" का सामना करना पड़ सकता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नागेश पाटिल ने कहा कि राउत वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें डांटने का अधिकार है, लेकिन हर किसी में जवाब देने की क्षमता भी होती है।
उन्होंने कहा, "ऐसे बयानों के परिणाम क्या हो सकते हैं, यह संजय राउत अच्छी तरह जानते हैं।"
दिल्ली बैठक से गायब रहे थे 6 सांसद
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तब तेज हुई जब 17 जून को दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में छह सांसद शामिल नहीं हुए। इनमें नागेश पाटिल आष्टीकर, संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल थे।
इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि ये सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
दल-बदल कानून पर भी नजर
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल नौ सांसद हैं। दल-बदल विरोधी कानून के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ दूसरे दल में शामिल होते हैं तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में इन राजनीतिक घटनाक्रमों पर महाराष्ट्र की राजनीति में सभी की नजर बनी हुई है।
फिलहाल नागेश पाटिल आष्टीकर का शिंदे गुट में शामिल होना उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य सांसदों के रुख पर भी सभी की नजर रहेगी।

