नई दिल्ली: भारत में आपातकाल (Emergency) लगाए जाने के लगभग 50 वर्ष बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में इस विषय को शामिल किया है। नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक "Understanding Society: India and Beyond" में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया है जब देश 1975 में लागू हुए आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने को याद कर रहा है। NCERT के अधिकारियों के अनुसार कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में पहली बार आपातकाल पर विस्तृत चर्चा को शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास और उसकी चुनौतियों के बारे में बेहतर समझ मिल सके।
क्या था 1975 का आपातकाल?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया था। सरकार ने इसे "आंतरिक अशांति" (Internal Disturbance) के आधार पर लागू किया था। यह आपातकाल मार्च 1977 तक चला।
इस दौरान नागरिकों के कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई थी और विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा आंदोलनकारियों को बड़ी संख्या में गिरफ्तार किया गया था।
NCERT की पुस्तक में कहा गया है कि इस अवधि के दौरान लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर दबाव पड़ा और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए।
नई किताब में क्या लिखा गया है?
पुस्तक में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में बेरोजगारी, महंगाई और शासन व्यवस्था को लेकर जनता में असंतोष बढ़ रहा था। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा था।
पाठ्यपुस्तक के अनुसार जून 1975 में लागू आपातकाल के दौरान अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। मीडिया की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया था और अनेक राजनीतिक नेताओं को जेल में डाल दिया गया था।
किताब में इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए एक गंभीर परीक्षा बताया गया है, जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के महत्व को सामने रखा।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी प्रकाश
नई पाठ्यपुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व वाले आंदोलन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। NCERT ने बताया है कि जेपी आंदोलन ने विशेष रूप से बिहार और गुजरात में छात्रों तथा आम नागरिकों को संगठित किया।
जयप्रकाश नारायण को समाजवादी विचारक और राजनीतिक नेता के रूप में प्रस्तुत करते हुए पुस्तक बताती है कि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए बड़े पैमाने पर जन आंदोलन खड़ा किया था।
पुस्तक में यह भी कहा गया है कि 1977 में आपातकाल हटने और आम चुनाव होने के बाद जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। इससे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और जनता की शक्ति का प्रदर्शन हुआ।
लोकतंत्र की चुनौतियों पर विशेष अध्याय
आपातकाल का विषय केवल ऐतिहासिक घटना के रूप में नहीं बल्कि लोकतंत्र के सामने आने वाली चुनौतियों के उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है।
इस अध्याय में फेक न्यूज, गलत सूचना (Misinformation), सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, सामाजिक भेदभाव, गरीबी, क्षेत्रवाद, लैंगिक असमानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण जैसे मुद्दों को भी लोकतंत्र के लिए चुनौती बताया गया है।
NCERT का मानना है कि लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित नहीं है बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, जिम्मेदारी और जागरूकता पर भी निर्भर करता है।
'Democracy and You' सेक्शन पहली बार जोड़ा गया
नई पुस्तक में "Democracy and You" नामक एक नया खंड भी जोड़ा गया है। NCERT के अनुसार इसका उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि वे केवल विद्यार्थी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के सक्रिय नागरिक भी हैं।
इस खंड में छात्रों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी गई है तथा यह बताया गया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका हो सकती है।
भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं पर भी जोर
पाठ्यपुस्तक केवल आपातकाल तक सीमित नहीं है। इसमें भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपराओं, स्थानीय स्वशासन और आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाओं की भी चर्चा की गई है।
किताब में यह बताया गया है कि भारत में लोकतांत्रिक सोच और सामूहिक निर्णय की परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी दिखाई देती है।
मीडिया को बताया गया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ
NCERT की नई पुस्तक में मीडिया की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसमें मीडिया को "लोकतंत्र का चौथा स्तंभ" बताया गया है।
किताब के अनुसार मीडिया जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने, सत्ता की जवाबदेही तय करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
साथ ही छात्रों को यह भी समझाया गया है कि डिजिटल युग में सूचना की सत्यता की जांच करना क्यों जरूरी है।
भारत के लोकतंत्र का विशाल स्वरूप
पुस्तक में भारत के लोकतंत्र की विशालता को दर्शाने वाले कई आंकड़े भी दिए गए हैं। NCERT ने बताया है कि 2024 के आम चुनावों में देश में 96.8 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता थे।
इसके अलावा लाखों मतदान केंद्रों और चुनाव प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए भारतीय लोकतंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बताया गया है।
पंचायती राज और महिला सशक्तिकरण के उदाहरण
किताब में गुजरात और त्रिपुरा की पंचायतों के उदाहरण भी दिए गए हैं। इन उदाहरणों के माध्यम से बताया गया है कि स्थानीय स्तर पर लोकतंत्र कैसे काम करता है और नागरिक किस प्रकार शासन में भागीदारी कर सकते हैं।
महिलाओं के मतदान अधिकार, पंचायतों में आरक्षण और स्थानीय निकायों में उनकी भागीदारी पर भी विशेष चर्चा की गई है।
शिक्षा जगत में नई बहस की शुरुआत
कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल को शामिल किए जाने के बाद शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। समर्थकों का मानना है कि छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों की जानकारी मिलनी चाहिए। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय को संतुलित और तथ्यात्मक तरीके से पढ़ाया जाना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
NCERT द्वारा कक्षा 9 की किताब में आपातकाल को शामिल करना भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। यह कदम छात्रों को लोकतंत्र, संविधान, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्व को समझाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
नई पुस्तक न केवल इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना को सामने लाती है, बल्कि यह भी बताती है कि लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की जागरूकता, भागीदारी और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान पर निर्भर करती है।

