Pahalgam Terror Attack: 15 अप्रैल से रची जा रही थी पहलगाम आतंकी हमले की साजिश, NIA चार्जशीट में बड़ा खुलासा

Praveen Yadav
0
नई दिल्ली: Pahalgam Terror Attack मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट से कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की साजिश घटना से करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू कर दी गई थी। डिजिटल सबूतों और आतंकियों के मोबाइल फोन से मिले डेटा के आधार पर जांच एजेंसी ने दावा किया है कि पूरी योजना 15 अप्रैल 2025 से सक्रिय थी और पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर लगातार आतंकियों को निर्देश दे रहे थे।

नई दिल्ली: Pahalgam Terror Attack मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट से कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की साजिश घटना से करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू कर दी गई थी। डिजिटल सबूतों और आतंकियों के मोबाइल फोन से मिले डेटा के आधार पर जांच एजेंसी ने दावा किया है कि पूरी योजना 15 अप्रैल 2025 से सक्रिय थी और पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर लगातार आतंकियों को निर्देश दे रहे थे।


NIA Chargesheet Pahalgam Attack के अनुसार 22 अप्रैल 2025 को हुए इस भीषण आतंकी हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय घोड़ा चालक की जान चली गई थी। अब जांच में सामने आए नए डिजिटल सबूतों ने इस हमले की पूरी साजिश को लेकर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं।


ऑपरेशन महादेव के बाद मिला सबसे बड़ा सुराग

जांच एजेंसी के मुताबिक 28 जुलाई 2025 को श्रीनगर के पास चलाए गए ऑपरेशन महादेव में एक आतंकी मारा गया था। उसके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच के दौरान ऐसे डिजिटल सबूत मिले, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी।


मोबाइल फोन में गूगल मैप के दो स्क्रीनशॉट मिले, जिन पर 15 और 16 अप्रैल 2025 की टाइम-स्टैंप दर्ज थी। इन स्क्रीनशॉट में बैसरन घाटी के आसपास की लोकेशन दिखाई दे रही थी। जांच एजेंसी का मानना है कि इन्हीं लोकेशनों का इस्तेमाल हमले की योजना तैयार करने और आतंकियों की मूवमेंट तय करने के लिए किया गया।


GPS ऐप के जरिए पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश

Pahalgam Attack Investigation में सबसे अहम खुलासा आतंकियों के मोबाइल फोन में मिले एक GPS आधारित ऐप को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि इसी ऐप के जरिए बैसरन घाटी की लोकेशन साझा की जा रही थी और पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर लगातार आतंकियों को निर्देश भेज रहे थे।


NIA के अनुसार पाकिस्तान में मौजूद आतंकी हैंडलर साजिद जट्ट इसी ऐप के माध्यम से पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहा था। चार्जशीट में कहा गया है कि मोबाइल फोन में मौजूद टाइम-स्टैंप यह साबित करते हैं कि हमले की तैयारी कम से कम 15 अप्रैल से शुरू हो चुकी थी।


जांच में यह भी सामने आया कि जिस GPS आधारित ऐप का इस्तेमाल किया गया, उसका उपयोग आमतौर पर ट्रैकिंग, नेविगेशन और ट्रेकिंग के लिए किया जाता है। लेकिन आतंकियों ने उसी तकनीक का इस्तेमाल लोकेशन साझा करने, रास्ते तय करने और एक-दूसरे की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया।


हमले से एक दिन पहले स्थानीय ढोक में रुके थे आतंकी

NIA की जांच में यह भी सामने आया कि 21 अप्रैल 2025 यानी हमले से ठीक एक दिन पहले तीनों आतंकी एक स्थानीय निवासी परवेज अहमद की ढोक (पहाड़ी क्षेत्रों में चरवाहों की झोपड़ी) में रुके थे। जांच एजेंसी के अनुसार परवेज अहमद और उसके चाचा बशीर अहमद पर आतंकियों को खाना और ठहरने की जगह उपलब्ध कराने का आरोप है। इसी आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया था।


जांच एजेंसी ने आतंकियों के मोबाइल फोन से कई तस्वीरें, चैट के स्क्रीनशॉट, आगे बढ़ने के निर्देश, रास्तों की जानकारी और बैसरन पार्क की GPS लोकेशन भी बरामद की है। इन डिजिटल सबूतों को चार्जशीट का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।


पाकिस्तान में बैठा साजिद जट्ट बताया गया साजिश का मास्टरमाइंड

Pahalgam Terror Attack News में NIA ने दावा किया है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी हैंडलर साजिद जट्ट इस पूरे हमले का मुख्य साजिशकर्ता था। जांच एजेंसी के अनुसार उसने पाकिस्तान में बैठकर गुप्त और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क के जरिए पूरे ऑपरेशन की योजना तैयार की और आतंकियों को लगातार निर्देश देता रहा।


चार्जशीट के मुताबिक साजिद जट्ट ने आतंकियों को बैसरन घाटी की GPS लोकेशन भेजी, ड्रोन के जरिए हथियार और अन्य सामान गिराने की व्यवस्था कराई तथा हमले से पहले और बाद में उनकी गतिविधियों का समन्वय किया। जांच एजेंसी का कहना है कि बरामद डिजिटल साक्ष्य इस पूरे नेटवर्क की पुष्टि करते हैं।


सुरक्षित गवाह के बयान से जांच को मिली नई दिशा

NIA Chargesheet में एक सुरक्षित गवाह के बयान का भी उल्लेख किया गया है। गवाह ने जांच एजेंसी को बताया कि उसकी मुलाकात सितंबर 2024 में आतंकी फैसल जाट से हुई थी। उस समय उसके साथ तीन अन्य आतंकी भी मौजूद थे और सभी पंजाबी तथा उर्दू भाषा में बातचीत कर रहे थे।


गवाह के अनुसार बातचीत के दौरान साजिद जट्ट का नाम बार-बार सामने आया। चारों आतंकी गोगल दारा जंगल के एक स्थान और वहां ड्रोन के जरिए सामान पहुंचाने की योजना पर चर्चा कर रहे थे। NIA का मानना है कि यह बयान डिजिटल सबूतों के साथ मेल खाता है और जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ है।


मोबाइल फोन और ऐप्स से मिले कई अहम सबूत

जांच एजेंसी ने चार्जशीट में कहा है कि बरामद दोनों मोबाइल फोन पाकिस्तान से खरीदे गए थे। आतंकियों ने इनमें कई विशेष ऐप डाउनलोड कर रखे थे, जिनके जरिए वे एक-दूसरे और अपने ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के संपर्क में रहते थे।


मोबाइल फोन से मिली चैट, स्क्रीनशॉट, लोकेशन हिस्ट्री और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच के बाद जांच एजेंसी ने पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार की। NIA का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों ने हमले की योजना, आतंकियों की आवाजाही और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की भूमिका को समझने में महत्वपूर्ण मदद की।


1,100 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ, दिसंबर 2025 में दाखिल हुई चार्जशीट

Pahalgam Attack Investigation के दौरान NIA ने 1,100 से अधिक गवाहों से पूछताछ की। इसके अलावा डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर जांच पूरी की गई।


जांच एजेंसी ने दिसंबर 2025 में इस मामले की चार्जशीट अदालत में दाखिल की। चार्जशीट में आतंकी नेटवर्क, डिजिटल कम्युनिकेशन, स्थानीय सहायता, पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और हमले की योजना से जुड़े कई पहलुओं का उल्लेख किया गया है।


निष्कर्ष

Pahalgam Terror Attack मामले की जांच में सामने आए डिजिटल सबूतों ने इस आतंकी हमले की योजना और उसके संचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने रखी हैं। NIA का दावा है कि GPS ऐप, मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा और गवाहों के बयान इस मामले की अहम कड़ियां हैं। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगे की कार्रवाई अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ेगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*