Venezuela Earthquake 2026: वेनेज़ुएला में 39 सेकंड के अंतराल पर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप, 10 हजार से अधिक मौतों की आशंका, अमेरिका और भारत ने भेजी मदद

Praveen Yadav
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काराकास/नई दिल्ली: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला (Venezuela) में बुधवार शाम आए दो भीषण भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। एक मिनट से भी कम समय के भीतर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन शक्तिशाली भूकंपों ने राजधानी काराकास (Caracas) समेत कई राज्यों को हिला कर रख दिया। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 32 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है।

काराकास/नई दिल्ली: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला (Venezuela) में बुधवार शाम आए दो भीषण भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। एक मिनट से भी कम समय के भीतर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन शक्तिशाली भूकंपों ने राजधानी काराकास (Caracas) समेत कई राज्यों को हिला कर रख दिया। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 32 लोगों की मौत और 700 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक नुकसान इससे कहीं अधिक हो सकता है।


अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने आशंका जताई है कि इस विनाशकारी आपदा में मृतकों की संख्या 10,000 से अधिक तक पहुंच सकती है। कई इमारतें ढह गई हैं, सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, बिजली और पेट्रोल आपूर्ति बाधित हुई है तथा हजारों लोग अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है।


39 सेकंड के भीतर आए दो शक्तिशाली भूकंप

स्थानीय समयानुसार शाम 6:04 बजे पहला भूकंप आया जिसकी तीव्रता 7.2 मापी गई। इसका केंद्र याराकुई राज्य के सैन फेलिपे क्षेत्र के पास बताया गया। हालांकि लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला था कि केवल 39 सेकंड बाद दूसरा और अधिक शक्तिशाली 7.5 तीव्रता का भूकंप आया।


दूसरे झटके ने सबसे अधिक तबाही मचाई। कई बहुमंजिला इमारतें धराशायी हो गईं और बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दब गए। राजधानी काराकास समेत कई शहरों में लोग अपने घरों से निकलकर सड़कों और खुले मैदानों में रात बिताने को मजबूर हो गए।


काराकास में भारी तबाही, एयरपोर्ट का हिस्सा भी ढहा

राजधानी काराकास में भूकंप के झटके बेहद तेज महसूस किए गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में इमारतों में दरारें, सड़कों पर मलबा और लोगों में अफरा-तफरी देखी जा सकती है।


वेनेज़ुएला के मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सिमोन बोलिवार इंटरनेशनल एयरपोर्ट का एक हिस्सा भी ढह गया है। सुरक्षा कारणों से हवाई अड्डे को तत्काल बंद कर दिया गया। प्रारंभिक वीडियो फुटेज में यात्रियों को टर्मिनल से भागते हुए देखा गया जबकि छतों से धूल और मलबा गिर रहा था।


सरकार ने राजधानी के कई इलाकों में आपातकालीन निकासी अभियान शुरू कर दिया है।


कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने घोषित किया आपातकाल

वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी। उन्होंने नागरिकों से शांत रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।


राष्ट्रपति के साथ गृह मंत्री और नेशनल असेंबली प्रमुख जॉर्ज रोड्रिगेज भी मौजूद थे। सरकार ने राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।


उन्होंने भूकंप में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार हर प्रभावित क्षेत्र तक सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रही है।


20 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स ने बढ़ाई चिंता

भूकंप के बाद स्थिति और अधिक गंभीर तब हो गई जब अगले कुछ घंटों में 20 से अधिक आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी झटके महसूस किए जा सकते हैं।


इसी डर के कारण हजारों लोग अभी तक अपने घरों में वापस नहीं लौटे हैं। कई परिवार खुले मैदानों, पार्कों और अस्थायी शिविरों में रात गुजार रहे हैं।


सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य कौन-कौन से हैं?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार उत्तरी तटीय क्षेत्रों में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। इनमें ला गुआरिया, अरागुआ, कराबोबो, फाल्कन, याराकुई और मिरांडा राज्य प्रमुख हैं।


काराकास के पालोस ग्रांदेस और अल्तामीरा इलाके भी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां कई इमारतें असुरक्षित घोषित कर दी गई हैं।


अमेरिका ने भेजी राहत और बचाव सहायता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अमेरिकी एजेंसियों को तत्काल सहायता के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की कि अमेरिका वेनेज़ुएला में खोज एवं बचाव दल, चिकित्सा सहायता, राहत सामग्री और मानवीय सहायता भेज रहा है।


रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस कठिन समय में वेनेज़ुएला के लोगों के साथ खड़ा है और प्रभावित क्षेत्रों तक हर संभव सहायता पहुंचाई जाएगी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया शोक

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वेनेज़ुएला में आए विनाशकारी भूकंप पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।


प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस मुश्किल समय में वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता से खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।


इसके जवाब में राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन उनके देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।


भूकंप क्यों आया? क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

विशेषज्ञों के अनुसार वेनेज़ुएला दुनिया के उन क्षेत्रों में स्थित है जहां भूकंप का खतरा लगातार बना रहता है। यहां कैरिबियन प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट एक-दूसरे से टकराती और खिसकती रहती हैं।


USGS के मुताबिक बुधवार को आए दोनों भूकंप इन्हीं टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर हुई भूगर्भीय हलचल का परिणाम थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लेटों के बीच मौजूद फॉल्ट लाइन में अचानक हुई तेज गति की गतिविधि के कारण यह शक्तिशाली भूकंप आया।


विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया है कि दोनों भूकंप एक जटिल भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं और आगे भी तीव्र आफ्टरशॉक्स आने की संभावना बनी हुई है।


कोलंबिया तक महसूस हुए झटके

भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसके झटके पड़ोसी देश कोलंबिया की राजधानी बोगोटा तक महसूस किए गए। कई स्थानों पर लोग इमारतों से बाहर निकल आए और एहतियात के तौर पर सार्वजनिक स्थलों को खाली कराया गया।


हालांकि सबसे अधिक नुकसान वेनेज़ुएला में ही हुआ है, जहां राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।


मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका

राहतकर्मी लगातार मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई स्थानों पर संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन अभी तक नहीं हो पाया है।


USGS द्वारा जारी संभावित आकलन में कहा गया है कि यदि बड़े पैमाने पर इमारतों के ढहने और जनसंख्या घनत्व को ध्यान में रखा जाए तो मृतकों की संख्या हजारों में पहुंच सकती है।


फिलहाल पूरा वेनेज़ुएला राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में जुटा हुआ है जबकि दुनिया भर के कई देश सहायता भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

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