WhatsApp Username फीचर पर सरकार की नजर: इम्पर्सनेशन और सुरक्षा चिंताओं के बीच जांच तेज

Praveen Yadav
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नई दिल्ली, 1 जुलाई 2026: मेटा की स्वामित्व वाली मैसेजिंग ऐप WhatsApp के आने वाले नए Username फीचर को लेकर भारत सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। सरकार इस फीचर की कानूनी और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सभी संभावित खामियों की गहन जांच कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि इस फीचर में किसी प्रकार का जोखिम पाया जाता है, तो सरकार कंपनी को औपचारिक नोटिस जारी करने और आवश्यक होने पर फीचर को रोकने तक पर विचार कर सकती है।

नई दिल्ली, 1 जुलाई 2026: मेटा की स्वामित्व वाली मैसेजिंग ऐप WhatsApp के आने वाले नए Username फीचर को लेकर भारत सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। सरकार इस फीचर की कानूनी और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सभी संभावित खामियों की गहन जांच कर रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि इस फीचर में किसी प्रकार का जोखिम पाया जाता है, तो सरकार कंपनी को औपचारिक नोटिस जारी करने और आवश्यक होने पर फीचर को रोकने तक पर विचार कर सकती है।


यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की प्राइवेसी को बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव कर रहा है। नया Username फीचर उपयोगकर्ताओं को अपने मोबाइल नंबर की जगह एक यूनिक यूजरनेम बनाने और उसी के जरिए अन्य लोगों से जुड़ने की सुविधा देगा। हालांकि, इस बदलाव को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों और सरकारी एजेंसियों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं।


सरकार को क्यों है चिंता?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, WhatsApp का यह नया फीचर जहां एक तरफ उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी को मजबूत करने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ यह इम्पर्सनेशन (किसी और की पहचान बनाकर धोखाधड़ी करना) जैसे साइबर अपराधों को बढ़ावा दे सकता है।


अधिकारियों का मानना है कि जब यूजर्स फोन नंबर के बजाय केवल यूजरनेम से पहचाने जाएंगे, तो फर्जी प्रोफाइल बनाना और किसी व्यक्ति या संस्था की नकल करना और भी आसान हो सकता है। इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग और साइबर ठगी के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका है।


सूत्रों ने बताया कि सरकार इस फीचर के सभी कानूनी पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें डेटा सुरक्षा कानून, आईटी एक्ट और यूजर प्रोटेक्शन गाइडलाइंस शामिल हैं। यदि किसी भी स्तर पर यह फीचर जोखिमपूर्ण पाया जाता है, तो इसे सीमित करने या रोकने के लिए कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।


WhatsApp का नया Username फीचर क्या है?

WhatsApp द्वारा प्रस्तावित Username फीचर एक नया सिस्टम है, जिसमें प्रत्येक यूजर अपने लिए एक यूनिक नाम चुन सकेगा। इस फीचर के लागू होने के बाद यूजर्स को एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए फोन नंबर साझा करने की जरूरत नहीं होगी।


यूजर केवल Username के जरिए ही दूसरे व्यक्ति को सर्च कर सकेंगे और बातचीत शुरू कर सकेंगे। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो अपनी प्राइवेसी को लेकर अधिक सतर्क रहते हैं और अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक नहीं करना चाहते।


Meta का दावा है कि यह फीचर यूजर्स को एक अतिरिक्त सुरक्षा और सुविधा प्रदान करेगा। इससे सोशल इंटरैक्शन अधिक सुरक्षित और नियंत्रित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई तकनीक के साथ जोखिम भी आते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


इम्पर्सनेशन का बढ़ता खतरा

इम्पर्सनेशन यानी किसी और व्यक्ति की पहचान बनाकर धोखाधड़ी करना, आज के समय में एक बड़ा साइबर अपराध बन चुका है। पहले से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को ठगने के मामले सामने आते रहे हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि Username आधारित सिस्टम में यह खतरा और बढ़ सकता है क्योंकि यहां पहचान पूरी तरह से डिजिटल नाम पर आधारित होगी। अगर कोई व्यक्ति किसी प्रसिद्ध व्यक्ति, संस्था या ब्रांड के नाम जैसा Username रिजर्व कर लेता है, तो आम यूजर्स आसानी से भ्रमित हो सकते हैं।


इससे न केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी बढ़ सकती है, बल्कि बैंकिंग फ्रॉड, OTP स्कैम और फिशिंग अटैक जैसे साइबर अपराधों में भी बढ़ोतरी की संभावना है।


WhatsApp का पक्ष

WhatsApp का कहना है कि यह फीचर अभी विकास और परीक्षण के चरण में है और इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि Username सिस्टम में सुरक्षा के लिए कई लेयर होंगे, ताकि फर्जी पहचान और दुरुपयोग को रोका जा सके।


हालांकि, अभी तक इस फीचर के ग्लोबल रोलआउट की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।


सरकार की संभावित कार्रवाई

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में यह पाया जाता है कि यह फीचर भारतीय यूजर्स की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है, तो सरकार Meta को नोटिस जारी कर सकती है। इसके अलावा, कानूनी प्रावधानों के तहत इस फीचर को भारत में ब्लॉक करने तक की कार्रवाई भी संभव है।


अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार किसी भी नई डिजिटल तकनीक को पूरी तरह रोकने के बजाय उसे सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से लागू करने के पक्ष में है।


निष्कर्ष

WhatsApp का Username फीचर जहां डिजिटल कम्युनिकेशन को आसान और अधिक प्राइवेसी-फ्रेंडली बनाने का वादा करता है, वहीं इससे जुड़े सुरक्षा जोखिम भी गंभीर हैं। सरकार और टेक कंपनियों के बीच यह संतुलन बनाना जरूरी होगा कि तकनीक का लाभ भी मिले और यूजर्स की सुरक्षा भी बनी रहे।


आने वाले समय में इस मामले पर सरकार का अंतिम फैसला यह तय करेगा कि भारत में यह फीचर कैसे और किस रूप में लागू होगा।

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