मणिपुर में गहराया नया संकट: एम्बुश और अपहरण के बाद कुकी-नागा समुदाय में टकराव तेज, आर्थिक नाकेबंदी से जनजीवन ठप

Praveen Yadav
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JanDrishti Today: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर पिछले कई महीनों से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। मैतेई और कुकी-जो समुदाय के बीच चल रहे खूनी संघर्ष के बीच अब सूबे में एक नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुल गया है। राज्य के पहाड़ी जिलों में अब कुकी और नागा समुदाय के बीच तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

🔴 JanDrishti Today: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर पिछले कई महीनों से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है। मैतेई और कुकी-जो समुदाय के बीच चल रहे खूनी संघर्ष के बीच अब सूबे में एक नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुल गया है। राज्य के पहाड़ी जिलों में अब कुकी और नागा समुदाय के बीच तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है।


पिछले कुछ दिनों में घाटी और पहाड़ी इलाकों के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुए घातक घात लगाकर हमलों (Ambush), नागरिकों के अपहरण और जवाबी अपहरण की घटनाओं ने आग में घी डालने का काम किया है। इस नए विवाद के बाद दोनों समुदायों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी हो गई है, जिससे मणिपुर में शांति बहाली की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।


ताजा हिंसा की शुरुआत 13 मई को कांगपोकपी (Kangpokpi) जिले के टाइगर रोड पर चर्च के तीन प्रमुख पादरियों और धार्मिक नेताओं की घात लगाकर की गई हत्या के बाद हुई। इस एम्बुश में चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। इसके ठीक बाद नोनी (Noney) जिले में भी एक नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई और उसकी पत्नी को घायल कर दिया गया, जिसके बाद दोनों समुदायों के सशस्त्र गुट आमने-सामने आ गए हैं।


'अपहरण और बंधक संकट' बना नया हथियार: 38 से अधिक लोगों को बनाया गया बंदी

चर्च नेताओं की हत्या के तुरंत बाद मणिपुर में अपहरण और काउंटर-अपहरण का एक बेहद भयावह दौर शुरू हो गया। दोनों समुदायों से जुड़े सशस्त्र उग्रवादी और स्थानीय गुट एक-दूसरे के निर्दोष नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम (Govindas Konthoujam) ने इस गंभीर स्थिति को स्वीकार करते हुए आधिकारिक आंकड़े जारी किए हैं।


प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों और पहाड़ी संपर्क मार्गों से गुजरने वाले आम नागरिकों और मालवाहक ट्रकों के चालकों को बंधक बनाया जा रहा है। सेना, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस की संयुक्त टीमें इन बंधकों को छुड़ाने के लिए जंगलों और संवेदनशील इलाकों में लगातार बड़े सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।


📊 अपहरण और बंधक संकट से जुड़े मुख्य आधिकारिक आंकड़े:

📌 कुल बंधक: मणिपुर के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों समुदायों के विभिन्न सशस्त्र समूहों द्वारा कुल 38 से अधिक नागरिकों को अवैध रूप से बंधक (Hostage) बनाया गया।


📌 ताजा शिकायत: से नापति (Senapati) पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत के अनुसार, 7 ट्रकों और 1 कार में यात्रा कर रहे 23 कुकी ग्रामीणों को अज्ञात हथियारबंद लोगों ने जबरन रोककर हिरासत में ले लिया।


📌 सफलतापूर्वक रिहाई: यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC), चर्च के वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षा एजेंसियों की मध्यस्थता के बाद रातभर चली बातचीत के बाद 28 बंधकों को सुरक्षित मुक्त कराया जा चुका है।


📌 अभी भी लापता: नागरिक समाज के दावों के मुताबिक, शुरुआती समझौते के बाद भी कम से कम 6 नागा नागरिक और कई कुकी ग्रामीण अब भी गायब हैं, जिनकी तलाश जारी है।


आर्थिक नाकेबंदी और अनिश्चितकालीन बंद से पहाड़ी जिलों की रीढ़ टूटी

अपहरण की इन घटनाओं और अपने नागरिकों की सुरक्षित रिहाई की मांग को लेकर कुकी और नागा दोनों ही समुदायों के शीर्ष संगठनों ने राज्य में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसके कारण मणिपुर के कई जिलों में पूरी तरह से लॉकडाउन जैसी स्थिति पैदा हो गई है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ गई है।


यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और कुकी-जो संगठनों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में समानांतर रूप से की गई नाकेबंदी के कारण इम्फाल को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल और जीवन रक्षक दवाओं की भारी किल्लत होने का खतरा पैदा हो गया है।


📊 बंद और नाकेबंदी का जमीनी असर:

🔴 पूरी तरह ठप जिले: कांगपोकपी (Kangpokpi), चूराचाँदपुर (Churachandpur) और चंदेल (Chandel) जिलों में संगठनों के आह्वान पर अनिश्चितकालीन बंद (Shutdown) लागू है।


🔴 यूएनसी की नाकेबंदी: यूनाइटेड नागा काउंसिल ने अपने गायब 6 नागा नागरिकों की सकुशल वापसी न होने के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी (Economic Blockade) शुरू कर दी है।


🔴 कुकी संगठनों की मांग: कुकी-जो संगठनों ने बंद को आगे बढ़ाते हुए केंद्र सरकार से कानून व्यवस्था की स्थिति सुधारने और उनके लिए एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था (Separate Administration) करने की मांग तेज कर दी है।


त्रिकोणीय संघर्ष में बदला मणिपुर का संकट: शांति की अपील बेअसर<

विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर का जातीय संकट अब दोतरफा न रहकर त्रिकोणीय (Meitei, Kuki, Naga) रूप लेता जा रहा है। घाटी में बहुसंख्यक मैतेई और पहाड़ियों में कुकी-जो के बीच साल 2023 से चल रही जंग में अब नागा समुदाय के सीधे जुड़ जाने से पूरा उत्तर-पूर्व भारत बेहद संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है। मिजोरम और मणिपुर के मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से चर्च नेताओं की हत्या की कड़ी निंदा की है और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।


मणिपुर सरकार ने इस पूरे संकट को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। सरकार को संदेह है कि कुछ असामाजिक तत्व और उग्रवादी संगठन राज्य में जानबूझकर शांति बहाली की प्रक्रियाओं को बाधित कर रहे हैं। राज्य के नागरिक उड्डयन और शांति वार्ता से जुड़े मंत्रियों ने दोनों पक्षों से हथियार डालने और बातचीत की मेज पर आने की अपील की है, लेकिन जमीन पर तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

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