🔴 JanDrishti Today: बिहार में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान अचानक बढ़े पुलिस एनकाउंटरों ने राज्य की राजनीतिक आबो-हवा को पूरी तरह से गरमा दिया है। सूबे में कानून-व्यवस्था को लेकर छिड़ी यह बहस अब विशुद्ध रूप से जातीय राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो चुकी है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पदभार संभालने के बाद से राज्य के अलग-अलग जिलों में अपराधियों के खिलाफ पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की कार्रवाई में तेजी आई है। लेकिन विपक्ष ने इन मुठभेड़ों के तौर-तरीकों और आरोपियों की पृष्ठभूमि को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ चलाई जा रही इस धरपकड़ मुहिम को अनौपचारिक रूप से 'हाफ एनकाउंटर' या 'ऑपरेशन लंगड़ा' कहा जा रहा है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस टीम पर हमला करने वाले या भागने का प्रयास करने वाले कुख्यात बदमाशों के पैर में गोली मारकर उन्हें दबोचा जा रहा है।
इस प्रशासनिक और पुलिसिया कार्रवाई पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। तेजस्वी यादव का दावा है कि सूबे में अपराधियों की जाति देखकर और एक खास समुदाय को चिन्हित कर निशाना बनाया जा रहा है, जिसने राज्य में एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
पिछले पांच हफ्तों में हुए 11 एनकाउंटर: क्या कहते हैं जमीनी आंकड़े?
बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा पुलिस मुठभेड़ों की संख्या और उनमें शामिल आरोपियों की हो रही है। सरकारी आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महज पांच हफ्तों के भीतर बिहार के अलग-अलग हिस्सों में ताबड़तोड़ पुलिसिया कार्रवाई हुई है।
इन अभियानों के दौरान पुलिस ने अपराधियों के मजबूत सिंडिकेट पर चोट करने का दावा किया है। पटना, सीवान, भागलपुर, नवादा और समस्तीपुर जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस और अपराधियों के बीच सीधी मुठभेड़ के कई मामले सामने आए हैं, जिसके बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ है।
📊 पिछले 5 हफ्तों में हुए एनकाउंटर का पूरा लेखा-जोखा:
📌 कुल बड़ी मुठभेड़ें: सूबे के विभिन्न जिलों में पिछले 5 हफ्तों में कुल 11 बड़े एनकाउंटर दर्ज किए गए।
📌 अपराधियों की मौत: इन मुठभेड़ों के दौरान पुलिस की जवाबी गोलीबारी में 2 बड़े और कुख्यात अपराधियों को ढेर किया गया है।
📌 घायल आरोपी (हाफ एनकाउंटर): पुलिस के साथ हुई क्रॉस-फायरिंग में कुल 9 आरोपी पैरों में गोली लगने से घायल हुए हैं, जिन्हें 'ऑपरेशन लंगड़ा' के तहत गिरफ्तार किया गया।
📌 विपक्ष का जातीय दावा: आरजेडी और विपक्ष का दावा है कि इन 11 प्रमुख एनकाउंटरों में से 6 आरोपी अकेले यादव समुदाय से आते हैं, जबकि 5 अन्य आरोपी गैर-यादव जातियों के हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पलटवार: 'क्या पुलिस अब जाति पूछकर गोली चलाएगी?'
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा एनकाउंटर को 'जातीय चश्मे' से देखे जाने के आरोपों पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेहद कड़ा और तंजिया अंदाज में पलटवार किया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अपराधियों के प्रति सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और इसे किसी भी सूरत में शिथिल नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने तेजस्वी यादव के आरोपों को खारिज करते हुए सार्वजनिक मंच से एक तीखा सवाल उछाला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि पुलिस एनकाउंटर करने से पहले अपराधियों की जाति पूछे, जो कि पूरी तरह से हास्यास्पद और सामान्य समझ के खिलाफ है।
📊 सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का स्टैंड:
🔴 48 घंटे का अल्टीमेटम: मुख्यमंत्री ने बिहार पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कोई भी अपराधी या माफिया पुलिस टीम को चुनौती देता है या कानून हाथ में लेता है, तो उसे 48 घंटे के भीतर करारा जवाब मिलना चाहिए।
🔴 सुशासन की पहचान: सरकार का कहना है कि बिहार को अपराध मुक्त बनाना और राज्य में कानून का राज स्थापित करना उनकी पहली प्राथमिकता है, जिसे सुशासन के रूप में स्थापित किया जाएगा।
🔴 निष्पक्ष कार्रवाई का दावा: पुलिस मुख्यालय के उच्चाधिकारियों (ADG रैंक) ने स्पष्ट किया है कि बिहार पुलिस किसी भी अपराधी की जाति या धर्म देखकर कार्रवाई नहीं करती, बल्कि केवल उसके आपराधिक इतिहास और वारदात के आधार पर कदम उठाए जाते हैं।
मुख्य एनकाउंटर और उनमें मारे गए या घायल हुए अपराधियों की सूची
बिहार पुलिस की एसटीएफ और जिला पुलिस की टीमों ने हाल के दिनों में जिन बड़े मामलों को अंजाम दिया है, वे अब राजनीतिक दलों के बयानों का मुख्य आधार बन चुके हैं। इनमें दो मामले ऐसे हैं जहां अपराधियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है, जबकि बाकी मामलों में आरोपियों को पैर में गोली लगी है।
इन सभी मामलों में पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस की टीमों पर आधुनिक हथियारों से फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसके बाद आत्मरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।
📊 बिहार में हाल ही में हुए प्रमुख एनकाउंटर और आरोपियों की प्रोफाइल:
📌 रामधनी यादव (भागलपुर): भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) की दिनदहाड़े दफ्तर में घुसकर हत्या करने का मुख्य आरोपी। पुलिस मुठभेड़ में मारा गया, इस पर कई गंभीर मामले दर्ज थे।
📌 सोनू यादव (सीवान): सीवान जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व एमएलसी मनोज कुमार सिंह के भतीजे की हत्या का मुख्य शूटर। पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में ढेर हुआ।
📌 दिलीप राय (22 अप्रैल - पटना): पटना पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से घायल हुआ, जिसे इलाज के बाद जेल भेजा गया।
📌 मिंटू यादव (26 अप्रैल - नवादा): नवादा जिले में सक्रिय कुख्यात बदमाश, जो पुलिस टीम पर फायरिंग के बाद हाफ एनकाउंटर में पकड़ा गया।
📌 छोटू कुमार यादव (30 अप्रैल - सीवान): सीवान मर्डर केस से जुड़ा एक और आरोपी, जिसे तड़के पुलिस मुठभेड़ में दोनों पैरों में गोली लगी।
📌 अवधेश साव और पप्पू राय (12 मई - पटना): पटना में हुई इस संयुक्त कार्रवाई में वैश्य समुदाय से आने वाले अवधेश साव और यादव समुदाय के पप्पू राय पुलिस की गोलीबारी में घायल हुए।
📌 अंकित कुमार सिंह (18 मई - सीवान): राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखने वाला यह आरोपी पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से घायल हुआ।
📌 प्रिंस बर्नवाल (20 मई - समस्तीपुर): वैश्य समुदाय का यह आरोपी समस्तीपुर में पुलिस घेराबंदी को तोड़कर भागने के प्रयास में 'ऑपरेशन लंगड़ा' का शिकार हुआ।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी कूदे विवाद में, आरजेडी पर साधा तीखा निशाना<
एनकाउंटर के बहाने बिहार में शुरू हुई इस जातीय जंग में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी एंट्री ले ली है। जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया और दलितों व वंचितों के अधिकारों का मुद्दा उठाया।
जीतन राम मांझी ने आरजेडी नेताओं से सीधे तौर पर कुछ बेहद तीखे और असहज करने वाले सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती, लेकिन विपक्ष हमेशा अपराधियों के साथ अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश करता है।
📊 जीतन राम मांझी द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल:
🔴 जेलों में बंद कैदियों की संख्या: मांझी ने पूछा कि आखिर बिहार की जेलों में बंद अधिकांश कैदी और सजायाफ्ता लोग एक ही खास जाति से क्यों ताल्लुक रखते हैं?
🔴 जमीन विवाद और अत्याचार: राज्य में भूमि विवाद, जमीनों पर अवैध कब्जे और दलितों के खिलाफ होने वाले अधिकांश अत्याचार के मामलों में एक ही वर्ग के लोगों का नाम सामने क्यों आता है?
🔴 दलितों और वक्फ की जमीन पर कब्जा: बिहार में दलितों, महादलितों और वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर अवैध अतिक्रमण के आरोपों के तार भी अक्सर उसी पृष्ठभूमि से क्यों जुड़ते हैं जिसका विपक्ष बचाव कर रहा है?
🔴 दलित अब डरने वाले नहीं: मांझी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार का दलित समाज अब किसी के दबाव या खौफ में रहने वाला नहीं है, और हर मोर्चे पर अपराधियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
निष्कर्ष: कानून-व्यवस्था बनाम सोशल इंजीनियरिंग की जंग
बिहार में एनकाउंटर संस्कृति को लेकर छिड़ा यह विवाद इतनी जल्दी थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार इसे सूबे से जंगलराज और संगठित अपराध को उखाड़ फेंकने की एक ईमानदार और सख्त मुहिम के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आरजेडी इसे अपनी पारंपरिक 'सोशल इंजीनियरिंग' और वोट बैंक को बचाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां हर मुद्दा अंततः जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द सिमट जाता है, वहां अपराधियों के खिलाफ होने वाली कानूनी कार्रवाई भी इससे अछूती नहीं रह सकती। विपक्ष इन एनकाउंटरों को मानवाधिकारों के उल्लंघन और अदालती प्रक्रिया को दरकिनार करने की कोशिश बता रहा है, जबकि आम जनता के एक बड़े वर्ग में त्वरित न्याय और कड़े कदमों की सराहना भी देखी जा रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या बिहार पुलिस विपक्ष के इन भारी दबावों और जातीय आरोपों के बीच अपनी 'ऑपरेशन लंगड़ा' मुहिम को इसी रफ्तार से जारी रखती है, या फिर राजनीतिक नफा-नुकसान को देखते हुए इस रणनीति में कोई बदलाव किया जाता है। फिलहाल, पटना से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे पर बयानबाजी का दौर पूरे शबाब पर है।

