कानपुर में पुलिस की गुंडागर्दी? गरीब ठेलेवालों से सामान लेकर नहीं दिया पैसा, शिकायत दर्ज

Praveen Yadav
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रक्षक या भक्षक? कानपुर के घाटमपुर में PRV पुलिस पर रेहड़ी-पटरी व्यापारियों के शोषण के आरोप

JanDrishti Today | ग्राउंड रिपोर्ट
कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में PRV 9303 पर तैनात पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। रेहड़ी-पटरी व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी उनसे जबरन सामान लेते हैं, भुगतान नहीं करते और विरोध करने पर धमकाते हैं।

घटना का पूरा मामला क्या है?

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि PRV 9303 पर तैनात कुछ पुलिसकर्मी स्थानीय रेहड़ी-पटरी व्यापारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं और उनसे बिना पैसे दिए सामान ले रहे हैं।

यह घटना बसंत विहार स्थित कुष्मांडा देवी तिराहा के पास की बताई जा रही है, जहां वर्षों से छोटे व्यापारी अपनी आजीविका चला रहे हैं। यहां पानीपुरी विक्रेता रामकरन और आइसक्रीम विक्रेता उदयराम उर्फ ईश्वर लंबे समय से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

व्यापारियों का आरोप: मुफ्तखोरी और धमकी

उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष महेश वर्मा के अनुसार, PRV पुलिसकर्मी अक्सर इन दुकानदारों से खाद्य सामग्री लेते थे लेकिन उसका भुगतान नहीं करते थे। शुरुआत में व्यापारियों ने इसे नजरअंदाज किया, लेकिन जब यह रोज की बात बन गई तो मामला गंभीर हो गया।

आरोप यह भी है कि जब व्यापारियों ने इस पर सवाल उठाया तो उन्हें डराया-धमकाया गया। पुलिसकर्मियों का यह व्यवहार न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह छोटे व्यापारियों की आजीविका पर सीधा हमला भी है।

वीडियो बना तो बदला व्यवहार

घटना में नया मोड़ तब आया जब व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष आशीष पांडेय को इस मामले की जानकारी मिली। उन्होंने मौके पर जाकर पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।

बताया जा रहा है कि जैसे ही पुलिसकर्मियों को वीडियो बनने की जानकारी मिली, वे मौके पर पहुंचे और 50 रुपये देकर मामला शांत कराने की कोशिश की। इस दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच कहासुनी भी हुई।

रंजिश में फिर पहुंची पुलिस?

व्यापार मंडल का आरोप है कि वीडियो बनाए जाने के बाद पुलिसकर्मी नाराज हो गए और उन्होंने बदले की भावना से कार्रवाई की। 28 मई की रात करीब 9:30 बजे PRV वाहन मौके पर पहुंचा और दोनों दुकानदारों के साथ गाली-गलौज की गई।

इतना ही नहीं, दुकानदारों को दुकान हटाने की धमकी दी गई और संगठन के पदाधिकारियों के लिए भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया।

सोशल मीडिया के जरिए उठी आवाज

इस पूरे मामले को दबाने की बजाय व्यापार मंडल ने इसे सार्वजनिक करने का फैसला किया। जिलाध्यक्ष महेश वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से डायल-112 के नोडल अधिकारियों को शिकायत भेजी।

उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों में आक्रोश देखने को मिला।

पुलिस प्रशासन का क्या कहना है?

घाटमपुर के एसीपी कृष्णकांत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है।

एसीपी के अनुसार, अगर जांच में PRV कर्मियों की संलिप्तता या लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छोटे व्यापारियों की मुश्किलें

यह घटना केवल एक पुलिस दुर्व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि यह छोटे व्यापारियों की असुरक्षा और संघर्ष को भी उजागर करती है। रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारी पहले ही आर्थिक तंगी, नगर निगम के नियमों और प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं।

ऐसे में अगर सुरक्षा देने वाली एजेंसी ही उनका शोषण करने लगे तो उनके लिए स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

क्या यह एक सिस्टम की समस्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले केवल व्यक्तिगत गलती नहीं होते, बल्कि यह सिस्टम की कमजोरी को भी दिखाते हैं। पुलिस में जवाबदेही की कमी और जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी ऐसे मामलों को बढ़ावा देती है।

अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से उठ सकता है।

JanDrishti Insights

JanDrishti Today की इस ग्राउंड रिपोर्ट से साफ है कि मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस और जनता के रिश्ते पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और इससे यह साबित होगा कि कुछ जगहों पर पुलिस की भूमिका 'रक्षक' से 'भक्षक' में बदलती नजर आ रही है।

अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा — यह आने वाला समय ही बताएगा।

निष्कर्ष

कानपुर के घाटमपुर की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आम नागरिक वाकई सुरक्षित हैं? क्या छोटे व्यापारियों को न्याय मिलेगा?

सरकार और प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि वे इस मामले को एक उदाहरण बनाएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में कोई भी वर्दी का गलत इस्तेमाल करने की हिम्मत न कर सके।

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