कानून और आधुनिकता के दावों के बावजूद भारत में रोज औसतन 16 से 18 महिलाएं दहेज की वेदी पर चढ़ रही हैं; यूपी और बिहार इस कुप्रथा की लिस्ट में सबसे ऊपर।
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द वायर हिंदी (The Wire Hindi) की विशेष खोजी रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिकता और महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातों के बीच भारत में दहेज (Dowry) के कारण होने वाली प्रताड़ना और संदिग्ध मौतें आज भी एक भयावह सामाजिक संकट बनी हुई हैं। हाल ही में देश के अलग-अलग हिस्सों— भोपाल से लेकर ग्रेटर नोएडा, बागपत और ग्वालियर तक, महज कुछ ही दिनों के भीतर कई युवा बेटियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों ने एक बार फिर देश को झकझोर कर रख दिया है।
आंकड़े और हालिया मामले गवाही देते हैं कि शिक्षा, कानून और ऊंचे ओहदों के बावजूद भारतीय समाज के भीतर से यह हिंसक और लालची सोच खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।
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हाल के चर्चित मामले: रसूखदारों के घरों में भी सुरक्षित नहीं बेटियां
दहेज के दानव ने समाज के हर वर्ग को अपनी चपेट में ले रखा है। हालिया घटनाओं में पीड़ित लड़कियां पढ़े-लिखे और रसूखदार परिवारों से ताल्लुक रखती थीं:
🎭 त्विषा शर्मा मामला (भोपाल): नोएडा की रहने वाली 33 वर्षीय मॉडल और पूर्व मिस पुणे त्विषा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के एक वकील समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज 5 महीने बाद, 12 मई 2026 को कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में लटका मिला। त्विषा की सास गिरिबाला सिंह खुद एक सेवानिवृत्त (Retired) जज हैं। इस रसूखदार परिवार पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज है। पति फिलहाल फरार है और सास अंतरिम जमानत पर हैं।
📱 दीपिका उर्फ निक्की नागर (ग्रेटर नोएडा): ग्रेटर नोएडा के वीआईपी इलाके में रहने वाली दीपिका की शादी के केवल 14 महीने बाद ही संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही फॉर्च्यूनर गाड़ी और करोड़ों रुपयों के दहेज के लिए उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। पोस्टमार्टम में शरीर पर अंदरूनी चोटों और खून बहने के निशान मिले हैं।
📹 मनीषा का आखिरी वीडियो (बागपत): उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की मनीषा ने दहेज और 'थार गाड़ी' की मांग से तंग आकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मौत से ठीक पहले मनीषा का एक दिल दहला देने वाला वीडियो सामने आया, जिसमें वह रोते हुए कैमरे के सामने ससुराल वालों द्वारा किए गए जुल्मों और प्रताड़ना की पूरी दास्तां बयां कर रही थी।
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क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े? (NCRB Data)
तमाम कड़े कानूनों के बावजूद देश में रोजाना बेटियां अपनी जान गंवा रही हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और आधिकारिक विश्लेषण के मुताबिक:
📊 रोजाना 16 से 18 मौतें: आंकड़ों के अनुसार, भारत में साल 2017 से 2022 के बीच दहेज और उससे जुड़े उत्पीड़न के कारण हर साल औसतन 7,000 महिलाओं की हत्या कर दी गई या उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा।
📌 2022 का भयावह सच: वर्ष 2022 में यह आंकड़ा 6,450 था, जिसका सीधा मतलब है कि देश में रोजाना औसतन 16 से 18 महिलाओं की मौत दहेज के चलते हो रही है।
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राज्यों की स्थिति: उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे आगे
दहेज हत्याओं और प्रताड़ना के मामलों में देश के दो बड़े राज्य सबसे बदनाम स्थिति में हैं। नीचे दिए गए टेबल में राज्यवार स्थिति को समझा जा सकता है:
रैंक: 01
राज्य का नाम: उत्तर प्रदेश (UP)
स्थिति / विवरण: दहेज हत्याओं और प्रताड़ना के मामलों में पूरे देश में शीर्ष (नंबर-1) पर है।
रैंक: 02
राज्य का नाम: बिहार (Bihar)
स्थिति / विवरण: इस कुप्रथा के चलते होने वाली मौतों की सूची में दूसरे पायदान पर बना हुआ है।
रैंक: 03
राज्य का नाम: मध्य प्रदेश (MP)
स्थिति / विवरण: तेजी से बढ़ते मामलों के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है।
रैंक: 04
राज्य का नाम: राजस्थान
स्थिति / विवरण: चौथे नंबर पर महिलाओं के खिलाफ इस अपराध में आगे है।
रैंक: 05
राज्य का नाम: पश्चिम बंगाल
स्थिति / विवरण: पांचवें स्थान पर है, जहां आंकड़ों के अनुसार इस कुप्रथा ने 337 महिलाओं की जान ली।
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'एडजस्टमेंट' और चुप्पी की सामाजिक संस्कृति
द वायर हिंदी के विश्लेषण में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि आधुनिक भारत में भी इस अपराध को सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर सामान्य (Normalize) मान लिया जाता है।
🔇 'समझौता' करने का दबाव: भारतीय समाज में आज भी बेटियों को बचपन से सिखाया जाता है कि चाहे ससुराल में कितनी भी प्रताड़ना मिले, उन्हें "एडजस्ट" (सामंजस्य) करना चाहिए। माता-पिता अक्सर समाज लोकलाज के डर से बेटियों को प्रताड़ना सहने की सलाह देते हैं।
🛡️ कानूनों का बेअसर होना: देश में दहेज निषेध अधिनियम, 1961 और घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम जैसे कई कड़े कानून मौजूद हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भी इसके लिए सख्त प्रावधान हैं। बावजूद इसके, पुलिस की ढीली जांच, रसूखदारों का दखल और गवाहों के मुकर जाने के कारण दोषियों को सजा मिलने की दर बेहद कम है।
💔 पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ता लालच: आज शादियों में उपहारों के नाम पर 'दहेज के लेनदेन' को स्टेटस सिंबल बना दिया गया है। जब तक समाज इस सोच को पूरी तरह खारिज नहीं करेगा, तब तक देश की बेटियां ऐसे ही लालच की बलि चढ़ती रहेंगी।
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