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कैटगरी (Niche): हेल्थ न्यूज़ / स्किन केयर और स्वास्थ्य
आजकल की बदलती जीवनशैली और पर्यावरण में हो रहे बदलावों के बीच एक बेहद चिंताजनक स्वास्थ्य रिपोर्ट सामने आई है। यूनाइटेड किंगडम (UK) में इन दिनों मेलानोमा स्किन कैंसर (Melanoma Skin Cancer) यानी त्वचा के कैंसर के मामले बहुत तेजी से रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा कारण सूरज से निकलने वाली खतरनाक पराबैंगनी किरणें (UV Radiation) और धूप में सुरक्षा के बिना ज्यादा समय बिताना है।
यह कैंसर कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर सही समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह शरीर के दूसरे अंगों में भी फैल सकता है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि मेलानोमा कैंसर क्या है, यूके में इसके मामले क्यों बढ़ रहे हैं और हम इससे अपना बचाव कैसे कर सकते हैं।
क्या होता है मेलानोमा स्किन कैंसर और यह क्यों फैलता है?
हमारी त्वचा में 'मेलानोसाइट्स' (Melanocytes) नाम की कोशिकाएं होती हैं, जो त्वचा को उसका रंग (पिगमेंट) देती हैं। जब इन कोशिकाओं पर सूरज की खतरनाक यूवी (UV) किरणें लगातार पड़ती हैं, तो इनका डीएनए (DNA) डैमेज हो जाता है। इसके कारण ये कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर का रूप ले लेती हैं। इसे ही मेलानोमा कहा जाता है।
यूके में इस कैंसर के बढ़ने का मुख्य कारण यह है कि वहां के लोग धूप सेकने (Sunbathing) के शौकीन होते हैं और छुट्टियों के दौरान बिना सनस्क्रीन लगाए लंबे समय तक तेज धूप में रहते हैं। इसके अलावा, ग्लोबल वार्मिंग के कारण बढ़ती गर्मी भी इस खतरे को बढ़ा रही है। कैंसर के प्रकारों और दुनिया भर में इसके आंकड़ों से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए आप WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की वेबसाइट पर जा सकते हैं।
यूवी रेडिएशन (UV Radiation) कितना खतरनाक है?
सूरज की रोशनी हमारे लिए जरूरी है, लेकिन उसमें मौजूद पराबैंगनी किरणें त्वचा के लिए साइलेंट किलर की तरह काम करती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यूवी रेडिएशन मुख्य रूप से दो तरह का होता है जो त्वचा को नुकसान पहुंचाता है:
- UVA किरणें: ये किरणें त्वचा के काफी अंदर तक जाती हैं और झुर्रियों तथा समय से पहले बुढ़ापा आने का कारण बनती हैं।
- UVB किरणें: ये किरणें त्वचा की ऊपरी सतह को झुलसा देती हैं, जिसे हम 'सनबर्न' कहते हैं। यही किरणें मेलानोमा कैंसर को जन्म देने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती हैं।
ABCDE नियम: त्वचा के कैंसर को पहचानने का आसान तरीका
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर आपके शरीर या त्वचा पर कोई पुराना तिल (Mole) है या कोई नया दाग उभर रहा है, तो आप 'ABCDE' फॉर्मूले से उसकी जांच कर सकते हैं:
| अक्षर (Letter) | क्या देखना है? (Meaning) | कैंसर के लक्षण (Warning Sign) |
|---|---|---|
| A (Asymmetry) | असममित आकार | तिल का आधा हिस्सा बाकी के आधे हिस्से से मेल नहीं खाता (आकार टेढ़ा-मेढ़ा होना)। |
| B (Border) | किनारे (बोर्डर) | तिल के किनारे साफ होने के बजाय कटे-फटे या धुंधले दिखाई देते हैं। |
| C (Color) | रंग का बदलना | पूरा तिल एक रंग का होने के बजाय उसमें काला, भूरा, लाल या नीला रंग दिखने लगता है। |
| D (Diameter) | व्यास (साइज) | यदि तिल का आकार 6 मिलीमीटर (एक पेंसिल के इरेज़र) से बड़ा होने लगे। |
| E (Evolving) | बदलाव आना | वक्त के साथ तिल के आकार, रंग में बदलाव होना या उसमें से खून-खुजली आना। |
स्किन कैंसर से बचने के जरूरी उपाय
भारत जैसे गर्म देश में भी तेज धूप से बचना बेहद जरूरी है। इसके लिए डॉक्टरों ने कुछ गाइडलाइंस जारी की हैं, जिन्हें अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है। त्वचा की देखभाल और कैंसर से बचाव की अधिक वैज्ञानिक जानकारियों के लिए आप Cancer Research UK की आधिकारिक गाइड पढ़ सकते हैं। मुख्य उपाय नीचे दिए गए हैं:
1. **सनस्क्रीन का इस्तेमाल:** घर से बाहर निकलने से 20 मिनट पहले कम से कम 30 या उससे ज्यादा SPF वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
2. **तेज धूप से बचें:** सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच सूरज की किरणें सबसे तेज होती हैं, इस दौरान सीधी धूप में जाने से बचें।
3. **पूरी आस्तीन के कपड़े:** धूप में निकलते समय शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े पहनें, चश्मा लगाएं और छाते का इस्तेमाल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. मेलानोमा स्किन कैंसर का मुख्य कारण क्या है?
इसका मुख्य कारण सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV Radiation) के संपर्क में लगातार आना है, जो त्वचा की कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाती हैं।
2. क्या सामान्य तिल कैंसर में बदल सकता है?
हां, यदि किसी पुराने तिल के आकार, रंग या बॉर्डर में अचानक तेजी से बदलाव होने लगे, या उसमें खुजली और खून आने लगे, तो वह मेलानोमा कैंसर का संकेत हो सकता है।
3. स्किन कैंसर से बचने के लिए कौन सी सनस्क्रीन लगानी चाहिए?
धूप से सुरक्षा के लिए कम से कम SPF 30 या उससे अधिक रेटिंग वाली 'ब्रॉड स्पेक्ट्रम' सनस्क्रीन का उपयोग करना चाहिए, जो UVA और UVB दोनों किरणों से रक्षा करे।
निष्कर्ष (Conclusion)
यूके की यह रिपोर्ट हमें सचेत करती है कि धूप को सिर्फ एक सामान्य मौसम का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। त्वचा की सेहत के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। यदि आपको भी अपनी त्वचा या किसी पुराने तिल पर कोई असामान्य बदलाव या दाग नजर आता है, तो बिना देरी किए किसी अच्छे डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) को जरूर दिखाएं। सही समय पर की गई जांच ही इस बीमारी का सबसे सटीक इलाज है।

