NCERT Textbooks Cartoon Row: क्या NCERT की किताबों में कार्टून होने चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज की कमेटी से समीक्षा करने को कहा

Praveen Yadav
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में उठाई आपत्ति, कहा— "पाठ्यपुस्तक (Textbook) ऐसी जगह नहीं है जहां कार्टून का इस्तेमाल किया जाए"; न्यायपालिका वाले विवादित चैप्टर के बाद अब कार्टूनों पर छिड़ी बहस।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में उठाई आपत्ति, कहा— "पाठ्यपुस्तक (Textbook) ऐसी जगह नहीं है जहां कार्टून का इस्तेमाल किया जाए"; न्यायपालिका वाले विवादित चैप्टर के बाद अब कार्टूनों पर छिड़ी बहस।


भारत की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में छपने वाले कार्टूनों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा सवाल उठाया है। शुक्रवार, 22 मई 2026 को एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के पूर्व शीर्ष न्यायाधीश (Retired Supreme Court Judge) की अध्यक्षता वाली एक विशेषज्ञ समिति को निर्देश दिया है कि वह NCERT की किताबों में शामिल कार्टूनों की गंभीरता से समीक्षा (Review) करे।


यह आदेश तब सामने आया जब केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्कूली किताबों में कार्टूनों के इस्तेमाल पर गंभीर आपत्ति जताई।


"किताबें कार्टून इस्तेमाल करने की जगह नहीं": सॉलिसिटर जनरल


सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूली शिक्षा और पाठ्यपुस्तकों की गरिमा का मुद्दा उठाया।


📊 तुषार मेहता की दलील: सॉलिसिटर जनरल ने पीठ के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा, "पाठ्यपुस्तक (Textbook) कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ आप कार्टूनों का इस्तेमाल करें।" उनका मानना था कि गंभीर शैक्षणिक विषयों, विशेषकर सामाजिक विज्ञान और राजनीतिक व्यवस्था जैसे अध्यायों में कार्टूनों का अनियंत्रित या व्यंग्यात्मक उपयोग बच्चों के मानस पर गलत प्रभाव डाल सकता है।


📌 सुप्रीम Court का निर्देश: सॉलिसिटर जनरल की इस आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को उस पूर्व जज-एलईडी कमेटी (Retired Judge-Led Committee) के पास भेज दिया, जो पहले से ही एनसीईआरटी के एक अन्य विवादित चैप्टर की समीक्षा कर रही है।


क्या है इस विवाद का बैकग्राउंड और इतिहास?

एनसीईआरटी की किताबों में कार्टूनों और अध्यायों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ महीनों से एक बड़ी कानूनी लड़ाई (Suo Motu Case) चल रही है।


⚖️ कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब पर बैन: फरवरी 2026 में, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब के एक अध्याय पर पूर्ण प्रतिबंध (Blanket Ban) लगा दिया था।


🛑 न्यायपालिका में भ्रष्टाचार (Judicial Corruption) का मुद्दा: इस चैप्टर में भारतीय न्यायपालिका के भीतर कथित भ्रष्टाचार (Corruption in Judiciary) पर चर्चा की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने और युवाओं के दिमाग में संस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने की एक गहरी साजिश करार दिया था।


📝 अवमानना नोटिस: कोर्ट ने इस मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए एनसीईआरटी के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश प्रसाद सकलानी और स्कूल शिक्षा सचिव को अवमानना (Contempt) का कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।


हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी कर रही है समीक्षा

जब एनसीईआरटी ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि उन्होंने उस विवादित अध्याय को 'री-राइट' (दोबारा लिख) लिया है, तो कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि बिना न्यायिक विशेषज्ञों की देखरेख के इसे कैसे बदला गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में कोर्ट को सूचित किया कि इस अध्याय को तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है।


📊 समिति के मुख्य सदस्य:

के.के. वेणुगोपाल: देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल (Former Attorney General) और वरिष्ठ अधिवक्ता।


जस्टिस इंदु मल्होत्रा: सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश।


जस्टिस अनिरुद्ध बोस: नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के डायरेक्टर और पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज।


अब इसी हाई-प्रोफाइल और प्रतिष्ठित समिति को एनसीईआरटी की सभी किताबों में मौजूद विभिन्न कार्टूनों की उपयुक्तता की जांच करने का जिम्मा भी सौंप दिया गया है। समिति यह तय करेगी कि क्या स्कूली स्तर पर बच्चों को संवेदनशील विषय समझाने के लिए कार्टूनों का उपयोग किया जाना न्यायसंगत है या नहीं।

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