RBI Dividend Transfer: केंद्र सरकार की लगी लॉटरी, RBI देगा ₹2,86,588 करोड़ का बंपर डिविडेंड

Praveen Yadav
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आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल ने रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर को दी मंजूरी; पिछले साल के ₹2.69 lakh करोड़ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ा; सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने में मिलेगी बड़ी मदद।

आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल ने रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर को दी मंजूरी; पिछले साल के ₹2.69 lakh करोड़ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ा; सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने में मिलेगी बड़ी मदद।


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय तोहफा दिया है। शुक्रवार, 22 मई 2026 को हुई केंद्रीय निदेशक मंडल (Central Board of Directors) की 622वीं बैठक में रिजर्व बैंक ने लेखा वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588.46 करोड़ (लगभग 2.87 लाख करोड़ रुपये) का सरप्लस (अधिशेष/लाभांश) ट्रांसफर करने की मंजूरी दे दी है।


आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में मुंबई में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में मौजूदा व्यापक आर्थिक कारकों (Macroeconomic Factors), बैंक के वित्तीय प्रदर्शन और जोखिम बफ़र्स को ध्यान में रखते हुए यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया।


पिछले साल का भी टूटा रिकॉर्ड

यह लगातार दूसरा साल है जब रिजर्व बैंक ने सरकार को उम्मीद से कहीं बड़ा लाभांश दिया है, जिससे देश के खजाने को भारी मजबूती मिलेगी।


📊 2024-25 का रिकॉर्ड: पिछले साल (लेखा वर्ष 2024-25) आरबीआई ने सरकार को ₹2,68,590.07 करोड़ (2.69 लाख करोड़ रुपये) का लाभांश दिया था, जो उस समय का रिकॉर्ड था।


📌 सालाना बढ़ोतरी: इस साल का डिविडेंड पिछले साल के मुकाबले करीब 6.7% अधिक है।


🔴 बजट अनुमानों से आगे: केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में रिजर्व बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से कुल मिलाकर ₹3.16 लाख करोड़ के लाभांश का अनुमान लगाया था। अकेले आरबीआई से मिले इस ₹2.86 लाख करोड़ के बंपर फंड के बाद सरकार का वास्तविक राजस्व बजट अनुमान से काफी आगे निकल जाएगा।


आखिर क्यों हुआ आरबीआई को इतना भारी मुनाफा?

आर्थिक विश्लेषकों और बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान रिजर्व बैंक की कमाई बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:


📈 विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रियता: पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में देखी गई हलचल के दौरान आरबीआई ने मुद्रा बाजार (Currency Market) में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया। रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए डॉलर की बिक्री से बैंक को बड़ा ट्रेडिंग मुनाफा हुआ।


💵 विदेशी संपत्तियों पर बेहतर रिटर्न: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 3% बढ़कर करीब $688 बिलियन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची होने के कारण इन विदेशी संपत्तियों और निवेशों पर आरबीआई को भारी ब्याज मिला।


कंटिंजेंट रिस्क बफर (CRB) को रखा गया सुरक्षित

इतना बड़ा लाभांश देने के बावजूद रिजर्व बैंक ने देश की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया है।


आरबीआई ने 'आर्थिक पूंजी ढांचे' (Economic Capital Framework - ECF) के कड़े नियमों का पालन करते हुए कंटिंजेंट रिस्क बफर (Contingency Risk Buffer - CRB) को एक मजबूत स्तर पर बनाए रखा है। सीआरबी वह आपातकालीन फंड होता है जिसे रिजर्व बैंक किसी भी अप्रत्याशित वैश्विक आर्थिक झटके, मंदी या वित्तीय संकट से निपटने के लिए अपनी बैलेंस शीट के हिस्से के रूप में रिजर्व रखता है।


सरकार को कैसे मिलेगा इस पैसे का फायदा?

आरबीआई से मिले इस भारी-भरकम चेक से केंद्र सरकार को वित्तीय मोर्चे पर कई बड़े फायदे होंगे:


📉 राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) में कमी: इस अतिरिक्त नॉन-टैक्स रेवेन्यू (गैर-कर राजस्व) की मदद से सरकार को अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी आसानी होगी।


🏗️ कैपेक्स और बुनियादी ढांचा विकास: सरकार को सड़कों, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) पर खर्च बढ़ाने के लिए बाजार से आक्रामक रूप से कर्ज (Market Borrowing) लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


🌍 वैश्विक संकट से सुरक्षा: पश्चिम एशिया (Mid-East Crisis) के भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के बीच यह डिविडेंड भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़े 'शॉक एब्जॉर्बर' (सुरक्षा कवच) का काम करेगा।

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