नई दिल्ली: मोदी सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन (George Kurian) ने अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह फैसला सामने आया है।
राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद दिया इस्तीफा
जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला नहीं किया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया।
राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे जॉर्ज कुरियन
जॉर्ज कुरियन मोदी सरकार में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में भी राज्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मोदी कैबिनेट में ईसाई समुदाय का प्रमुख चेहरा
केरल से आने वाले जॉर्ज कुरियन मोदी सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका इस्तीफा भाजपा के दक्षिण भारत विशेषकर केरल में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
कुरियन लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं और पार्टी के अल्पसंख्यक संपर्क अभियान में उनकी अहम भूमिका रही है।
रवनीत सिंह बिट्टू का भी समाप्त हुआ राज्यसभा कार्यकाल
जॉर्ज कुरियन के साथ केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। हालांकि बिट्टू फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने हुए हैं। दोनों नेताओं को भाजपा ने राज्यसभा में अतिरिक्त कार्यकाल नहीं दिया है।
राजनीतिक हलकों में अब इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में मोदी कैबिनेट में कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
कौन हैं जॉर्ज कुरियन?
1960 में केरल के कोट्टायम जिले में जन्मे जॉर्ज कुरियन पेशे से सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। भाजपा की स्थापना के शुरुआती वर्षों से ही वे पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities) के उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है।
अल्पसंख्यक समुदायों के बीच भाजपा की पहुंच बढ़ाने में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी कारण उन्हें मोदी सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
क्या संकेत देता है यह इस्तीफा?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भाजपा के संगठनात्मक और संसदीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। राज्यसभा में नए चेहरों को मौका देने और आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व ने यह निर्णय लिया हो सकता है।
हालांकि अभी तक भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है कि भविष्य में जॉर्ज कुरियन को कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी या नहीं।
निष्कर्ष
मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनका मंत्रिमंडल से बाहर होना भाजपा की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी भविष्य में उन्हें कौन सी नई जिम्मेदारी सौंपती है।
रिपोर्ट: Praveen Yadav | JanDrishti Today

