मुंबई, 19 जून: भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच दिनों से जारी तेजी शुक्रवार को थम गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला, जहां बड़े टेक शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
बीएसई सेंसेक्स 607.08 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,802.90 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 154.90 अंक यानी 0.64 प्रतिशत टूटकर 24,013.10 पर बंद हुआ। हालांकि दिनभर दबाव के बावजूद निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा।
आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली
शुक्रवार के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे कमजोर रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी कंपनी Accenture द्वारा कमजोर बिजनेस गाइडेंस दिए जाने के बाद आईटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ गया।
बीएसई पर सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे:
- इंफोसिस (6 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट)
- टीसीएस
- एचसीएल टेक
- टेक महिंद्रा
- एचडीएफसी बैंक
विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी सेक्टर में आई यह गिरावट निवेशकों की चिंता और वैश्विक संकेतों का असर है।
इन शेयरों ने दिखाई मजबूती
जहां एक तरफ आईटी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, वहीं कुछ कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी भी रही।
बाजार के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे:
- इटरनल (पूर्व में जोमैटो)
- भारती एयरटेल
- पावर ग्रिड
- ट्रेंट
- एनटीपीसी
- आईटीसी
- एलएंडटी
इन शेयरों में निवेशकों ने भरोसा दिखाया और बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।
क्या यह बड़ी गिरावट की शुरुआत है?
बाजार विशेषज्ञ विपिन दीक्षेना का कहना है कि यह पूरे बाजार में कमजोरी नहीं बल्कि एक सेक्टर विशेष यानी आईटी सेक्टर में आई तेज गिरावट का असर है।
उन्होंने कहा कि Accenture की गाइडेंस कटौती के बाद आईटी शेयरों में घबराहट वाली बिकवाली देखने को मिली, लेकिन इसके पीछे मजबूत बुनियादी कारण ज्यादा नजर नहीं आते।
उनके अनुसार, यह बाजार में बड़ी गिरावट नहीं बल्कि सेक्टर रोटेशन है। निवेशक महंगे हो चुके आईटी शेयरों से निकलकर बिजली, टेलीकॉम और फार्मा जैसे रक्षात्मक सेक्टरों की ओर जा रहे हैं।
स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाया दम
दिलचस्प बात यह रही कि जहां बड़े शेयरों में दबाव रहा, वहीं स्मॉलकैप शेयरों ने मजबूती दिखाई।
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 में लगभग 0.25% की बढ़त
- निफ्टी स्मॉलकैप 250 में लगभग 0.33% की बढ़त
इससे संकेत मिलता है कि खुदरा निवेशकों का भरोसा अभी भी बाजार पर बना हुआ है।
अमेरिका-ईरान समझौते का भी असर
बाजार पर वैश्विक घटनाओं का भी असर देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम हुईं।
ब्रेंट क्रूड लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे तेल आयात करने वाले भारत जैसे देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी।
हालांकि इस सकारात्मक खबर का असर आईटी सेक्टर की भारी गिरावट के सामने फीका पड़ गया।
तकनीकी स्तर पर क्या कहता है बाजार?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल बाजार की लंबी अवधि की तेजी बनी हुई है।
- निफ्टी अभी भी 24,000 के ऊपर है।
- RSI 67 के स्तर पर है, जो मजबूती का संकेत देता है।
- MACD भी पॉजिटिव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,000 के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में बड़ी कमजोरी की आशंका कम है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में सेक्टर आधारित बदलाव देखने को मिल रहा है। आईटी शेयरों में दबाव जरूर है, लेकिन अन्य सेक्टरों में खरीदारी जारी है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, वैश्विक आर्थिक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।
निष्कर्ष
लगातार पांच दिन की तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को आराम लिया। आईटी सेक्टर की भारी गिरावट ने बाजार को नीचे खींचा, लेकिन स्मॉलकैप, टेलीकॉम, पावर और कुछ रक्षात्मक सेक्टरों में मजबूती बनी रही। फिलहाल बाजार की लंबी अवधि की तस्वीर सकारात्मक दिखाई दे रही है, लेकिन निवेशकों को वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखनी होगी।

