संजय राउत का बागी सांसदों पर फूटा गुस्सा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी तीखी प्रतिक्रिया; बोले- 'पार्टी छोड़नी है तो पहले इस्तीफा दो'

Praveen Yadav
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संजय राउत, शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बुधवार को कथित बागी सांसदों पर जमकर निशाना साधा। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने नाराजगी जाहिर करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और मीडिया से यहां तक कह दिया कि उनके बयान को काटा न जाए। महाराष्ट्र में चल रही ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

संजय राउत, शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बुधवार को कथित बागी सांसदों पर जमकर निशाना साधा। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राउत ने नाराजगी जाहिर करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और मीडिया से यहां तक कह दिया कि उनके बयान को काटा न जाए। महाराष्ट्र में चल रही ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं के बीच उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।


बागी सांसदों को दी खुली चेतावनी

संजय राउत ने कहा कि यदि कोई सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाकर दोबारा जनादेश लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता इस बार ऐसे विश्वासघात को बर्दाश्त नहीं करेगी।


राउत ने कहा, "अगर किसी को जाना है तो इस्तीफा देकर जाए। यदि हमारे सांसदों के बारे में ऐसी खबरें आ रही हैं तो उन्हें सामने आकर इसका खंडन करना चाहिए। इस बार महाराष्ट्र की जनता चुप नहीं बैठेगी।"


अनिल देसाई ने किया राउत का बचाव

राउत के विवादित बयान के बाद शिवसेना (यूबीटी) सांसद अनिल देसाई ने उनका बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही गई बातें किसी विशेष व्यक्ति के लिए नहीं थीं।


देसाई ने कहा, "जो कुछ कहा गया, वह सामान्य बोलचाल की भाषा थी। जब कोई व्यक्ति 50 वर्षों तक सार्वजनिक जीवन में राजनीति करता है और भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है तो ऐसी बातें निकल जाती हैं। उन्होंने किसी विशेष व्यक्ति को लक्ष्य नहीं बनाया।"


‘खून-पसीना बहाकर जिताया, फिर भी पार्टी छोड़ेंगे तो नहीं छोड़ेंगे’

राउत ने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व ने सांसदों को जिताने के लिए दिन-रात मेहनत की थी। उन्होंने कहा कि यदि कोई सांसद पार्टी से अलग होने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


उन्होंने कहा, "हमारे सांसदों को जिताने के लिए उद्धव जी और हमने खून-पसीना बहाया, पैसा लगाया, मेहनत की। इसके बावजूद अगर ऐसी खबरें आती हैं तो हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।"


15 करोड़ रुपये ऑफर किए जाने का लगाया आरोप

संजय राउत ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को तोड़ने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया जा रहा है।


उन्होंने दावा किया, "मेरे पास जानकारी है कि सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद वे नांदेड़, पुणे सहित तीन अलग-अलग स्थानों से चार्टर्ड फ्लाइट में सवार हुए। हमने कल होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी कर दिया है। अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा है।"


महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसदों में से सात सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और वे सत्तारूढ़ दल में शामिल हो सकते हैं।


हालांकि, अब तक किसी भी सांसद ने सार्वजनिक रूप से इन खबरों की पुष्टि नहीं की है और न ही पार्टी की ओर से किसी आधिकारिक टूट की घोषणा की गई है।


2022 में भी हुआ था शिवसेना में बड़ा विभाजन

गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था। उस बगावत के बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। अब एक बार फिर सांसदों के स्तर पर संभावित टूट की खबरों ने उद्धव ठाकरे गुट की चिंता बढ़ा दी है।


‘हमारी मां है शिवसेना’

संजय राउत ने भावुक होते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) उनके लिए मां के समान है और पार्टी के साथ विश्वासघात किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।


उन्होंने कहा, "शिवसेना (यूबीटी) हमारी मां है। जिन्होंने हमारे साथ रहने की कसम खाई है, यदि वे ऐसा करेंगे तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"


लोकसभा अध्यक्ष से मिलेंगे सांसद

सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद बुधवार सुबह 11 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं पार्टी के सभी लोकसभा सांसदों की बैठक 18 जून को दिल्ली स्थित संसदीय दल कार्यालय में बुलाई गई है।


राजनीतिक हलचल के बीच बढ़ी निगाहें

महाराष्ट्र की राजनीति में जारी इस घटनाक्रम ने आगामी चुनावों से पहले नई हलचल पैदा कर दी है। यदि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों में वास्तव में कोई टूट होती है तो इसका असर राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें 18 जून को होने वाली संसदीय दल की बैठक और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

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